चचेरी बहन के साथ ओरल सेक्स का मजा – Gaysex Stories

हॉट सिस्टर की कहानी मम्मी के एक दूर के रिश्तेदार की एक बेटी के साथ है जो मेरी बहन लगती थी। उसकी जवानी देख मैं ललचा गया लेकिन लालच उसे भी मेरे लंड का था।

दोस्तो, मैं बंगाल का रहने वाला हूं और मैंने अपनी पढ़ाई दिल्ली में रहकर की हुई है।
दिल्ली में मैं अपने घरवालों के साथ ही रहता था।
हर साल मैं अपनी मम्मी के साथ बंगाल जाता था जहां पर मेरे नाना नानी रहते थे।

ये हॉट सिस्टर की कहानी 2018 की है जब एक बार मैं कॉलेज की छुट्टियों में अपनी मम्मी के साथ नाना के यहां गया हुआ था।

हम लोग दस दिन तक वहां पर रुके और फिर बोर होने लगे।
फिर हमने अपने एक दूर के रिश्तेदार के यहां जाने का प्लान किया।

तो हम अगले दिन अपने रिश्तेदार के घर जाने के लिए निकल पड़े।
हमें वहां पहुंचने में 12 बज गए।

हम पहुंचे तो जाकर बेल बजाई और एक 19 साल की जवान लड़की ने दरवाजा खोला।
मैं उसको जानता था लेकिन कई साल पहले मैंने उसे देखा था।

इस बार जब देखा तो देखता रह गया कि तीन सालों के अंदर ही उसके बदन में कितने बदलाव आ गए हैं।
रिश्ते में वो मेरी दूर की बहन लगती थी।

उसका रंग थोड़ा सांवला था लेकिन फिगर बहुत अच्छा था। उसे देखकर कोई भी उसको चोदने की चाहत करे।

उसने हमें अंदर बुलाया क्योंकि उन लोगों को पहले से ही पता था कि हम लोग आने वाले हैं।
हमने थोड़ा आराम किया और फिर खाना भी 1 बजे तक हो गया।

सर्दियों के दिन थे तो बातों में ही शाम हो गई।
फिर मेरी मम्मी ने पास ही मेरी बुआ के घर जाने के लिए कहा।
इस बार मेरी बहन भी साथ गई।

रास्ते में हम दोनों के बीच में काफी सारी बातें हुईं और कई बार चलते हुए वो मेरा हाथ भी पकड़ लेती थी।
मुझे भी मजा आ रहा था और बार बार मेरा लंड खड़ा हो जा रहा था।
शायद उसको भी मैं पसंद आ गया था।

बुआ के घर बातें करते हुए हमें अंधेरा हो गया था।
हम लोग फिर छत पर चले गए और ऊपर जाकर वो मेरे हाथ को अपने हाथ में लेकर घूमने लगी।
मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया।

मैंने पैंट पहनी हुई थी और तना हुआ लंड साफ पता चल रहा था।
मेरा मन कर रहा था कि किसी तरह मेरा लंड इसके हाथ में आ जाए।
लेकिन अभी मैं ऐसा कोई कदम उठाने से डर रहा था।

तभी एकदम से मम्मी ने चलने के लिए आवाज लगा दी तो उसने हाथ छोड़ दिया और हम लोग नीचे आ गए।
हम लोग अब पैदल ही घर जाने लगे।

रास्ते में वो फिर से मेरा हाथ पकड़ रही थी और मेरा लंड उछलता रहा।

उनके घर आने के बाद हमने रात का खाना खाया और फिर सोने की तैयारी होने लगी।

हमारे रूम में एक डबल बेड था। मेरी बहन मेरी मम्मी के पास सोने की जिद करने लगी क्योंकि वो मेरी मॉम को बहुत प्यार करती थी और मेरी मम्मी भी उसको बहुत प्यार करती थी।

मैं भी सोचकर खुश था क्योंकि रात को सोते समय मुझे भी शायद उसके बदन को छूने और सहलाने का मौका मिलने वाला था।

हम लोग उसी बेड पर लेट गए और मैं एक कोने में लेटा था। मेरी मम्मी दूसरे कोने में लेटी थी जबकि मेरी बहन बीच में लेटी थी।

थोड़ी देर के बाद जब मम्मी सो गई तो वो खर्राटें लेने लगी।
ये देख मेरी बहन ने मेरे हाथ पर हाथ रख दिया।

मैंने उसकी तरफ घूमकर देखा तो उसने चुपके से मेरे होंठों पर अपनी उंगली रख दी।
मैं उसका इशारा समझ गया और जब तक मैं कुछ करने की सोचता वो थोड़ी सी सरक कर मेरे कम्बल के अंदर आ गई।

मेरे लंड में एकदम से तनाव आने लगा और मैंने उसके हाथ को पकड़वाकर अपने लंड पर रखवा दिया।
उसने लंड को तो नहीं पकड़ा लेकिन हाथ रखे रही।

उसके हाथ को मैंने अपने लंड पर दबाए रखा और जल्द ही मेरे लंड में वासना के झटके लगने लगे।
बार बार लंड उसके हाथ के नीचे उछलने लगा।

मैंने उसके होंठों पर उंगली फिरानी शुरू को तो उसने मुंह खोल दिया। मैंने उंगली उसके मुंह में दे दी और वो उसे चूसने लगी।
मुझे मजा आने लगा और लंड में और ज्यादा तनाव आने लगा।
अब मेरा लंड जैसे ऐंठने लगा था।

मेरी मम्मी दूसरी तरफ करवट लेकर लेटी हुई खर्राटें ले रही थी और इधर मेरी बहन मेरी उंगली अपने मुंह में लेकर ऐसे चूस रही थी जैसे लंड चूस रही हो।

उसका अंदाज देखकर मैं समझ गया कि यह पहले भी शायद किसी लड़के के साथ सेक्स कर चुकी है।
अब मेरा मन भी उसको चोदने के लिए कर रहा था।

अब मैं आगे बढ़ना चाहता था और मैंने उसके मुंह से उंगली को बाहर निकाल लिया।
उंगली बाहर निकाली तो उसने मुंह को खुला ही रखा।

उसके होंठों पर लार लगी थी जिससे वो काफी रसीले लग रहे थे।

उसको देखकर लग रहा था जैसे कि वो मेरा इंतजार कर रही हो कि मैं आगे बढ़कर उसके होंठों को चूसना शुरू कर दूं।
मैंने किया भी वैसे ही!

मैं थोड़ा आगे की ओर सरक लिया और उसके होंठों से होंठ मिला दिए।

मैंने उसकी टांग को अपनी टांग पर चढ़वा लिया और अब मेरा लंड उसकी जांघों के बीच में उसकी चूत के पास सट गया था।
मैं बड़े ही मजे से उसके होंठों को चूस रहा था।
हम दोनों जरा सी भी आवाज नहीं कर रहे थे क्योंकि मम्मी के जागने का डर भी था।

मेरे हाथ अब उसकी चूचियों पर चले गए।
उसकी चूचियां बहुत ही कसी हुई थीं और हाथ में लेने पर ऐसे लग रहा था जैसे क्रिकेट बॉल से थोड़ी बड़ी किसी नर्म बॉल को दबा रहा हूं।
मैं जोर से उसकी चूचियों को दबाना चाहता था लेकिन उस डर से रुका रहा कि अगर बहन की आवाज निकल गई तो मम्मी जाग जाएगी और सारा खेल वहीं के वहीं बंद हो जाएगा।

फिर मैंने उसके टॉप के अंदर हाथ डाल दिया।
नीचे उसने ब्रा पहनी हुई थी। जिसको मैंने उसे खोलने का इशारा किया।

उसने धीरे से उठकर अपने टॉप को ऊपर उठाया और ब्रा के हुक खोल दिए।

ब्रा निकाल कर उसने तकिया के नीचे दबा ली और मुझे अपनी गोरी और कसी हुई चूचियों की एक झलक दिखाने के बाद फिर से टॉप को नीचे करके लेट गई।

अब उसके टॉप के ऊपर से मैंने चूचियों पर दबाया तो उसकी आजाद चूचियों को दबाने, भींचने और मसलने में ज्यादा मजा आने लगा।

धीरे से मैंने हाथ अंदर डाल दिए और नंगी चूचियों को छूते ही मेरे बदन का पारा एकदम से 100 डिग्री पर पहुंच गया।
मैं उनको पीने के लिए बेताब हो गया।

मैंने उसको अपने पास किया और टॉप उठाकर उसकी चूचियों को मुंह में ले लिया।
मैं बारी बारी से चूचियों को पीने लगा और अब वो मेरी लोअर के ऊपर से मेरे लंड को पकड़ कर सहलाने और दबाने लगी।

उसका हाथ पकड़ कर मैंने अपनी लोअर के अंदर अंडरवियर में डलवा दिया और उसका हाथ मेरे लंड पर आकर कस गया।
वो उसकी चमड़ी को ऊपर नीचे करते हुए लंड पर हाथ चलाने लगी और मैं जैसे उसके हाथ को चोदने लगा।

मैंने उसकी गांड पर हाथ फिराना शुरू किया और उसकी नाइटी की पजामी में हाथ देकर उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसके चूतड़ों को दबाने लगा।
गांड भिचवाने से वो और ज्यादा उत्तेजित होने लगी।

फिर मैं हाथ को आगे ले आया और उसकी नाइटी के अंदर डालकर उसकी चूत को पहली बार छुआ।

हाथ रखने पर पता लगा उसकी चूत का पानी उसकी पैंटी को गीली कर चुका है।
हम दोनों एक ही कम्बल में थे तो मैंने सरक कर नीचे चला गया और उसकी पजामी को उतरवा दिया।

मैंने उसकी गीली पैंटी पर मुंह लगाकर सूंघा तो उसकी चूत की खुशबू में पागल हो गया। मैंने पैंटी नीचे खींचकर उसकी चूत को चूम लिया जिससे उसने मेरे सिर के बालों को खींच लिया।

मैं उसकी तड़प को समझ गया।
बहन की चूत अपने भाई के गर्म होंठों की छुअन से तड़प गई थी।

उसकी चूत को पहले मैंने कई बार किस किया और फिर उसको चाटने लगा।

मैं पहली बार चूत चाट रहा था और मुझे सच में बहुत मजा आ रहा था।
मेरी बहन की चूत से लगातार नमकीन रस निकल रहा था।

चूत का रस चाटते हुए ऐसा मन कर रहा था कि मैं इसको सारी रात ऐसे ही चाटता रहूं।

काफी देर मैंने उसकी चूत चाटी और वो इशारे से लंड डालने की बात कहती रही।
मैं तो चूसने चाटने का पूरा मजा लेना चाहता था।

फिर मैंने उसको धीरे से दूसरी तरफ घूमने का इशारा किया।
वो घूम गई और उसकी गांड ऊपर आ गई।

अब मैंने उसकी गांड के छेद पर जीभ से चाटना शुरू कर दिया।

वो बहुत मुश्किल से अपने आप को रोक पा रही थी।
मैंने उसको अब बिल्कुल पेट के बल लेटा लिया और बॉडी को बीच से उठाते हुए उसने गांड ऊपर उठा ली।

अब मेरी जीभ उसकी गांड के छेद से लेकर उसकी चूत तक चाटने लगी थी।

मेरा बहुत मन कर रहा था कि बस अब इसकी चूत में लंड देकर इसे चोद दूं लेकिन मम्मी भी साथ में सो रही थी इसलिए जल्दबाजी में कुछ नहीं कर सकते थे।

फिर मैंने उसकी चूत में उंगली डाल दी और धीरे धीरे उसकी चूत में उंगली को अंदर बाहर करने लगा।
अब हल्की हल्की सिसकारियों के साथ ऊंह … ऊंह करने लगी।

मैं उसके ऊपर आया और उसके गाल काटते हुए धीरे से उसके कान में फुसफुसाया- चुप रहो … मम्मी उठ जाएगी।
वो धीरे से बोली- डाल दो ना अब!

मैंने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और फिर से उसकी चूत में उंगली करने लगा।

दो-तीन मिनट के बाद उसके बदन में अकड़न सी हुई और उसकी चूत से ढेर सारा पानी निकल गया।
वो झड़ गई थी।

मैंने उसकी चूत से निकले सारे पानी को अपनी जीभ से चाटकर साफ कर दिया।
उसकी चूत को किस करके मैं कम्बल से बाहर आकर लेट गया।

मैं उसके होंठों को फिर से चूसने लगा और उसने मुझे आई लव यू बोल दिया।
फिर उसने मेरे कान में धीरे से कहा- भैया … अपनी बहन को भी तो अपने मन की इच्छा पूरी करने दो?
ये बोलकर वो मेरे कम्बल में नीचे की ओर चली गई और मेरी लोअर को नीचे खींच कर मेरी चड्डी को भी उतार दिया।

मेरा लंड अभी भी उफान पर था। उसने मेरे लंड को हाथ में पकड़ लिया। उसकी एक दो बार मुठ मारकर मेरे तपते लंड को मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगी।

वो मेरे लंड को बड़े चाव से चूस और चाट रही थी।
कभी वो उसके टोपे पर चाटती तो कभी मेरी गोलियों को मुंह में लेकर चूसने लगती।

पिछले पांच मिनट से मैं जैसे हवा में उड़ रहा था। कम्बल के अंदर मेरी जांघों के बीच में जैसे वासना का सैलाब होकर गुजर रहा था।
लग रहा था जैसे आज वीर्य की बाढ़ आ जाएगी और वो मेरी लंड की प्यासी बहन के पेट को गले तक भर देगा।

मैंने उसके सिर को पकड़ लिया और जोर से अपने लौड़े पर दबा दिया। लंड का टोपा मैंने उसके कंठ में लगता हुआ महसूस किया।

मैं भूल गया कि बगल में मम्मी लेटी है और वो उठ भी सकती है।
गनीमत रही कि मेरी बहन ने मेरे हाथों के दबाव को झेलते हुए मेरे लंड को भी गले में जगह दे दी और उसने उल्टी वैगरह नहीं की।

उसके होंठ मेरे झांटों पर आकर सट गए थे और उसके मुंह की गर्मी के आगे हार मानते हुए मेरे लौड़े ने मेरे टट्टों में वीर्य को उबाल दिया जिससे वो एकदम से मेरे लिंग मुंड से बाहर फूट पड़ा।
दे पिचकारी … दे पिचकारी … मेरे शरीर में लगते झटकों के साथ मैं अपनी लंड की प्यासी बहन के मुंह में खाली हो गया।

सारा वीर्य उसके मुंह में झाड़ने के बाद मैं शिथिल पड़ गया और मेरी सांसें भारी से धीरे धीरे हल्की होने लगीं।
मैंने ध्यान नहीं दिया कि मेरी बहन ने मेरे वीर्य का क्या किया।
बस मैं स्खलन के आनंद में डूबा हुआ था।

फिर वो उठी और हांफती हुई कंबल से बाहर गर्दन निकाली।
उसका मुंह लाल हो चुका था और वो बदहवास सी लग रही थी।
उसके होंठ खुले थे जिससे मुझे अंदाजा हो गया कि वो मेरे सांवले लंड के सफेद दूध को वो अपने भीतर में उतार चुकी है।

उसने थोड़ी नाराजगी भरी नजरों से मुझे देखा और फिर मैंने उसके गाल पर चूम लिया।
फिर मैंने सुरक्षा की दृष्टि से उसको उसके कम्बल में जाने के लिए कह दिया।

मेरा वीर्य तो झड़ गया था और उसकी चूत का पानी भी निकल गया था लेकिन इस आनंद में फिर भी एक अधूरापन था।

शायद उसकी चूत भी मेरे लंड का अहसास चखना चाहती थी और मेरा लंड भी उसकी चूत की गर्मी महसूस करने के लिए इंतजार करता रह गया।

ये मिलन अभी पूरा नहीं हुआ था लेकिन इसे पूरा होना ही पड़ा।

ये कैसे हुआ वो मैं आपको अपनी अगली कहानी में बताऊंगा।
आप इस हॉट सिस्टर की कहानी पर अपना फीडबैक मुझे कमेंट्स में जरूर दें।
कुछ और जानना चाहते हैं ईमेल में लिखें और मेरी बहन की चुदाई की कहानी जानना चाहते हैं तो मेरी अगली कहानी का इंतजार करें।
मेरा ईमेल आईडी है-

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