जवानी की शुरुआत मूसल लण्ड के साथ – Xxx Khaniya Hindi Me

मेरी कहानी की शुरुआत तब हुई जब मैं पढ़ता था। मैं उस समय बहुत मासूम और थोड़ा थोड़ा लड़की जैसा दिखता था। पड़ोस के एक आदमी ने मुझे चुदाई फोटो दिखाई तो …

दोस्तो, मैं अन्तर्वासना का बहुत पुराना पाठक हूँ। बहुत दिनों से मैं अपनी कहानी लिखने चाहता था। आज मैंने शुरुआत की है. अगर मेरी कहानी पाठकों को अच्छी लगी तो आगे भी कोशिश करता रहूँगा।

मेरा नाम प्रेम शर्मा है और मैं झारखंड के रहने वाला हूँ। मैं एक बाइ-सेक्सुअल हूँ। मेरी कहानी की शुरुआत तब हुई थी जब मैं पढ़ता था। मैं उस समय 5 फिट का दुबला पतला और गोरा लड़का था। मैं बहुत मासूम और थोड़ा थोड़ा लड़की जैसा दिखता था।

ये एक दुर्घटना से शुरू हुई थी लेकिन उस दिन मुझे ये अहसास हुआ कि मेरे अंदर एक लड़की भी है।

हम लोग किराये के घर में रहते थे और घर के आगे एक बड़ा आंगन था जहाँ हम क्रिकेट खेला करते थे. और घर के बगल में एक छोटा हॉस्पिटल था। वहां भीड़ बहुत ही कम रहती थी।

वहाँ जिनका हॉस्पिटल था उनका एक भाई रहता था। उनका नाम रमेश था वो 6 फिट का गोरा स्मार्ट 35 साल का गबरू आदमी था। जब हम क्रिकेट खेलते थे तो वो मझे बहुत गौर से देखता रहता था। मैं ज्यादा ध्यान नहीं देता था क्योंकि मैं बहुत हँसमुख लड़का था और सब से बात करता था इसलिए मुझे कुछ अटपटा नहीं लगता था।

एक दिन मैं अकेले ही आंगन में खेल रहा था तो उसने मुझे आवाज देकर बुलाया।
मैं उसके पास गया तो उसने मुझे बैठने के लिए बोला। उसके हाथ में एक बुक थी।

मुझे लगा कि ये कोई कॉमिक्स है तो मैंने पूछा भैया- कौन सा कॉमिक्स है?
तो उसने बोला- ये बड़े लोगों का कॉमिक्स है।
मैं बोला- मैं भी बड़ा हो गया हूँ और कॉमिक्स पढ़ता हूँ मुझे भी दिखाइए।

उसने मुस्कुराते हुए मुझे वो बुक दे दी. मैंने जैसे ही बुक का पेज पलटा मेरे होश उड़ गए। उसमें एक मर्द एक औरत का गांड में अपना लंड घुसाए हुए था।
मैं शर्मा गया.

उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोला- कैसा लगा बड़ों का कॉमिक्स?
मेरे तो होश उड़े हुए थे लेकिन अंदर ही अंदर सेक्स की आग लगी हुई थी. मैं सिर नीचे कर खड़ा रहा और उसने एक एक पेज पलट कर दिखाया.

उसमें अलग अलग एंगल से मर्द को औरत का गांड मारते और लंड चूसते हुए दिखाया हुआ था।

मैं सकपका के वहाँ से भाग गया।

मैंने पहली बार ऐसा फ़ोटो देखा था इसलिए मेरे नजर से वो नजारा हट ही नहीं रहा था। रात को भी मैं उसी के बारे में सोच रहा था। फ़ोटो में लड़के का लण्ड बहुत बड़ा था. मेरा तो उसका आधा भी नहीं था।

काफी देर तक सोचने पर मुझे अहसास हुआ कि मेरे लंड से पानी जैसा कुछ निकल रहा है।

मैंने हाथ डाला तो चिपचिपा पानी जैसा कुछ निकल रहा था और मेरा छोटा सा लंड खड़ा था।

अगले दिन जब मैं खेलने गया तो वो मुझे बहुत गौर से देख रहा था लेकिन शर्म से मैं उधर नहीं देखा। लेकिन अंदर ही अंदर मुझे वो फ़ोटो देखने की इच्छा जोर मार रही थी।

दो तीन दिन बाद बाद क्रिकेट खेलते हुए बॉल हॉस्पिटल के चारदीवारी में चल गया तो मैं बॉल लेने चला गया.
उसी समय उन्होंने मुझे टोका और पूछा- कॉमिक्स पसंद आया या नहीं?
मैं शर्मा गया लेकिन अंदर ही अंदर उसे देखने की इच्छा भी हो रही थी तो हिम्मत करके हाँ बोल दिया।
तो उन्होंने कहा कि 1 घण्टे में आना तो दूसरा कॉमिक्स दिखाऊंगा।

मैं फिर क्रिकेट खलने लगा लेकिन क्रिकेट में मन नहीं लग रहा था.

किसी तरह 1 घंटा बीता तो मैं इंतेज़ार करने लगा कि भैया कब बुलाएंगे।
तभी उन्होंने आने का इशारा किया तो मैं शर्माते हुए उनके पास गया तो उन्होंने मुझे दूसरी किताब दिखायी. मैं शर्माते हुए देख रहा था.
फिर उन्होंने कहा- इसमें शर्माने की क्या बात है? तुम बड़े हो गए हो. अब तो तुम्हारा भी खड़ा होता होगा.
और ये बोल कर मेरा लंड पर हाथ रख दिया।

मैं सकपका गया और हाथ हटा दिया लेकिन मुझे अंदर से बहुत अच्छा लगा। खैर फ़ोटो देखते हुए मेरी नजर उनकी पैन्ट में बंद लण्ड पर पड़ी तो मैं देखता रह गया. उनका लण्ड कॉमिक्स में फ़ोटो जैसा ही बड़ा और मोटा लग रहा था।

उन्होंने मुझे उनका लण्ड देखते हुए देख लिया और मुस्कुराते हुए बोले- ओरिजिनल लण्ड देखोगे?
मैं कुछ नहीं बोला.

उन्होंने इसका मतलब हाँ समझ लिया और अपना चैन खोल कर अपना लण्ड बाहर निकाल लिया।
उनका लण्ड देख कर मेरे मुँह से निकल गया- इतना बड़ा!
उनका लण्ड बहुत बड़ा था. मेरे लण्ड उनके सामने नुनु जैसा ही था।

फिर उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर अपने लण्ड पर रख दिया. मुझे अंदर से बहुत अच्छा भी लग रहा था और डर भी।
वे अपना लण्ड हाथ में ले कर बोले- चूसोगे?
मैं फिर शर्मा के वहाँ से भाग गया।

रात में मुझे केवल उनका लण्ड ही दिख रहा था और सोच रहा था कि इतना बड़ा लण्ड चूसने में कितना मज़ा आएगा. मेरे अंदर लड़कियों वाला गुण भी है; यह बात मैं पहली बार समझा।

दो दिन बाद फिर उन्होंने मुझे इशारा कर के बुलाया. मैं गया तो उन्होंने पूछा- कॉमिक्स कैसा लगा?
मैं बोला- अच्छा!

फिर उन्होंने पूछा- और मेरा लण्ड?
मैं शर्मा गया.

वो बोले- दोबारा देखोगे?
मैंने केवल सिर हां में हिलाया तो वो मुझे अपने रूम में ले गए और पैंट खोल कर बैठ गए. उस समय उनका लण्ड खड़ा नहीं था.
वो बोले- इसे थोड़ा सहलाओ, तब ये अपना सही रंग दिखायेगा.

मैं अपने को रोक नहीं सका और चुम्बक के तरह मेरे हाथ ने उनके लण्ड को पकड़ लिया।
थोड़ी देर में ही लण्ड अपना आकर लेने लगा और सुपर लण्ड बन गया. उसमें से पानी जैसा चिपचिपा निकल रहा था.

थोड़ी देर बाद उन्होंने कहा- चूसोगे?
मैंने इंकार किया तो वे मेरा सर पकड़ कर अपना लण्ड पास ले गए और सख़्ती से कहा- चुपचाप चूसो.

मैं डर गया और चुपचाप लण्ड को मुंह में ले लिया. कुछ देर में मुझे भी अच्छा लगने लगा।

5 मिनट चूसने के बाद उनके मुँह से अजीब आवाज आई और उनके लंड से गाढ़ा वीर्य मेरे मुँह में पिचकारी मारते हुए गिर गया. वो मदहोशी में मेरा सर पकड़कर लण्ड मेरे मुँह डाल कर झटका मारने लगे.
मजबूरी में उनका पूरा वीर्य मुझे पीना पड़ा।

मुझे बहुत अजीब महसूस हो रहा था लेकिन मज़ा भी आया।

यह मेरी सच्ची कहानी है. यह तो शुरुआत थी। मेरी स्टोरी कैसी लगी, अगर आप सबको अच्छी लगी तो अगली स्टोरी बताऊंगा कि कैसे मेरी गांड का उद्घाटन हुआ।

Posted in Gay Sex Stories In Hindi

Tags - family sex stories in hindigandi kahanihindi desi sexkamuktam antervasnamom xxx storyoral sexreal sex storyअंतर्वसानाsavita bhabhi story hindisex story new