बिल्डिंग की छत पर खोली गर्लफ्रेंड की सील – Office Me Chudi

देसी गर्लफ्रेंड सेक्सी कहानी मेरी बिल्डिंग में ही रहने वाली लड़की की चुदाई की है। मैंने उसको गर्लफ्रेंड बनाकर चुदाई के लिए पटाया और एक रात छत पर बुला लिया.

मेरा नाम राज है। मैं पुणे में रहता हूं।
आपने मेरी पिछली कहानियां तो पढ़ी होंगी, अगर नहीं पढ़ी हैं तो आप पढ़ना जरूर, आपको मज़ा आएगा।

मेरी पिछली कहानी
मेरी बीवी की पहली चुदाई उसके यार से
को आप लोगों ने इतना प्यार दिया उसके लिए आप सब का बहुत-बहुत धन्यवाद।

आज मैं आपके लिए अपनी एक नई स्टोरी लेकर आया हूं।
आशा करता हूं कि आपको मेरी आज की ये देसी गर्लफ्रेंड सेक्सी कहानी भी पसंद आएगी।

यह बात 2018 की है जब मैंने पहली बार अपनी गर्लफ्रेंड प्रतीक्षा (बदला हुआ नाम) की चुदाई की थी।
हम दोनों को उसमें बहुत मजा आया था।

मैं आपको वह घटना विस्तार से बताता हूं।

उन दिनों हमारे घर के बगल में एक कन्नड़ फैमिली रहती थी।
उनके साथ हमारी अच्छी बोलचाल थी।
प्रतीक्षा हमारे घर पर काफी समय बिताया करती थी।

धीरे धीरे मैं उसको पसंद करने लगा।
वो अभी जवान हो रही थी और उसके बदन में काफी बदलाव आता जा रहा था। उसकी छातियां उभरने लगी थीं और गांड भी बाहर की ओर आने लगी थी।

उसके गालों पर गुलाब सी लाली आने लगी थी और होंठ जैसे शहद की तरह रसीले लगने लगे थे।
उसकी जवानी देखकर मेरे लंड में भी तूफान उठ जाता था।
मैंने सोच लिया था कि इसकी जवानी का पहला भोग मैं ही लगाऊंगा।

इसलिए मैंने अब धीरे धीरे प्रतीक्षा पर डोरे डालने शुरू किये।
मैं उससे बात करने के बहाने ढूंढा करता था।

उसको पता लग गया कि मैं उसे पसंद करता हूं तो वो भी मुझे देखकर मुस्करा देती थी।
अब वो मुझे पूरी लाइन दे रही थी।

एक दिन मैंने उसको अपने दिल की बात भी कह ही दी और मैंने उसको कसकर गले से लगा लिया।
मन तो कर रहा था तभी उसकी सलवार में हाथ देकर उसकी चूत में उंगली दे दूं लेकिन वो शर्माकर भाग गई।

फिर धीरे धीरे हम दोनों में किस भी होने लगी।
किस करते हुए मैं उसके बूब्स भी दबाने लगा।
वो भी बड़े मजे से दबवाती थी।

मैं उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत को भी सहला दिया करता था।

अब मैं किसी ऐसे मौके की तलाश में था जब मैं प्रतीक्षा की चुदाई कर सकूं।

धीरे धीरे दिवाली का महीना नजदीक आ गया और नवरात्र शुरू हो गए।
अब सब लोग त्यौहार की तैयारियों में लगे रहते थे।

रात को कॉलोनी के लोग डांडिया खेलने के लिए निकल जाते थे।
इसी तरह रात में हमारी बिल्डिंग भी लगभग खाली ही हो जाती थी।

एक रात को मैंने मौका देखा और प्रतीक्षा को बिल्डिंग की छत पर मिलने के लिए कहा।

वो पूछने लगी तो मैंने कह दिया कि प्यार करेंगे।
मैंने उसकी चुदाई की पूरी तैयारी पहले से ही करके रखी हुई थी।

मौका देखकर मैंने वहां पर गद्दे पहले ही बिछा दिए थे।

फिर रात के 8 बजे बिल्डिंग के पास ही एक पार्क में डीजे शुरू हो गया।
सब लोग उसी कार्यक्रम में जाने लगे।

धीरे धीरे करके सारी बिल्डिंग खाली हो गई और 9 बजे तक बिल्डिंग में कोई भी नजर नहीं आ रहा था।
मैंने प्रतीक्षा को फोन किया और ऊपर आने के लिए कहा।

कुछ देर के बाद वो आ गई।
मैंने सबसे पहले उसे उसकी पसंद की चॉकलेट दीं।
वो उन्हें पाकर बहुत खुश हो गई।

चॉकलेट खाने के बाद हमने एक दूसरे के हाथों को थाम लिया।
हम दोनों एक दूसरे के गले लगकर एक दूसरे के जिस्म को सहलाने लगे।

धीरे धीरे हम दोनों गर्म होने लगे।
मैंने उसके चेहरे को पकड़ा और उसे होंठों पर किस करने लगा।
वो भी मेरा साथ देने लगी।
हम दोनों को किस करने में मजा आने लगा।

इसी बीच मेरे हाथ उसकी चूचियों पर पहुंच गए।
मैं उसके टीशर्ट के ऊपर से ही उसके मम्मों को दबाने लगा।
वो भी कसमसाने लगी।

फिर मैंने उसकी टीशर्ट में हाथ डाल दिए।
मैं उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसकी चूचियों को भींचने लगा।

अब मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसकी टीशर्ट को उतरवा दिया।

वो पहले तो ब्रा खोलने से मना करने लगी लेकिन मैंने उसे समझा दिया कि अभी दो घंटे से पहले बिल्डिंग में कोई नहीं आने वाला।
वैसे भी रात का समय है तो इस वक्त टेरेस पर तो वैसे भी कोई नहीं आएगा।

किसी तरह वो ब्रा खोलने के लिए तैयार हो गई।
उसने ब्रा उतारी और उसकी छोटी छोटी तनी हुई मगर गोरी चूचियां देखकर मैं बावला सा हो गया।

मैंने उसकी चूची को मुंह में भर लिया और उसकी नंगी पीठ को हाथों से थामकर जोर जोर से उसके बूब्स पीने लगा।

वो एकदम से सिहर गई।
उसकी सिसकारियां निकल पड़ीं- ओह्ह … राज … क्या कर रहे हो … आह्ह … नहीं …. आह्ह … उम्म … मम्मी … आह्ह … बहुत मजा आ रहा है … स्स्स … आह्ह … उफ्फ!

उसकी मस्त कामुक सिसकारियों से मेरा जोश भी बढ़ रहा था।
काली अंधेरी रात में उसको ऊपर से नंगी करके चूसने में बहुत उत्तेजना महसूस हो रही थी।

मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपनी पैंट पर ले गया।
मेरा लंड पहले से ही तना हुआ था।

पहले तो उसने मेरे लंड से हाथ हटा लिया।
मैंने दोबारा से उसका हाथ रखवाया तो उसने फिर लंड को पकड़ लिया।

वो मेरे लंड पर हाथ रखे रही लेकिन उसको सहला नहीं रही थी।
फिर मैंने अपनी पैंट खोल दी और नीचे सरका दी।

मैंने उसका हाथ अपने अंडरवियर में डलवा लिया तो उसका नर्म नर्म हाथ मेरे तपते हुए लंड पर आ लगा।

मेरे अंदर जोश कई गुना बढ़ गया।
मैंने उसकी चूचियों को पीते हुए उसकी लैगी के ऊपर से उसकी गांड को सहलाना शुरू कर दिया।

मैं बार बार उसके चूतड़ों को भींच रहा था।
मेरा लंड उसकी चूत के ऊपर जाकर रगड़ खा रहा था।

फिर मैंने उसको नीचे से पूरी नंगी कर लिया।
मैंने अपने कपड़े भी उतार लिए और पूरा नंगा हो गया।

हालांकि पूरा नंगा होने में बहुत रिस्क था लेकिन मैं उस वक्त चुदाई के जोश में कोई भी रिस्क लेने के लिए तैयार था।
हम दोनों नंगे हो चुके थे और मैंने प्रतीक्षा को नीचे गद्दे पर गिरा लिया।

मैं उसके ऊपर आ गया और उसके होंठों को पीते हुए उसकी चूत पर हथेली से सहलाने लगा।
उसकी चूत में गीलापन आ चुका था।

मैंने उसकी चूत में उंगली सरकाई तो वो एकदम से उचक गई और उसने उंगली को निकलवा दिया।

अब मैं और जोर से उसके होंठों को पी रहा था और उसकी चूचियों को मसलने लगा।
फिर मैंने अपने लंड को उसके मुंह के सामने कर दिया तो उसने चूसने से मना कर दिया।

मैंने भी उसको लंड चूसने के लिए फोर्स नहीं किया क्योंकि ये हमारा पहली बार ही था।

मैं तेजी से उसकी चूत को हथेली से रगड़ने लगा।

उसकी चूत से निकलते रस से मुझे पता चल रहा था कि वो भी चुदाई के लिए पूरी तरह से तैयार है।

अब मैंने उसकी चूत पर मुंह रखा और चूत को चूसना शुरू कर दिया।

वो एकदम से उम्म … आह्ह … उईईई … करने लगी।
उसकी सिसकारियां एकदम से तेज हो गईं।

मैं उसकी चूत में जीभ देकर चलाने लगा।
वो भी अपनी चूत को हल्की हल्की ऊपर उठाने लगी।

उसको चूत में मेरी जीभ का आना जाना बहुत मजा दे रहा था।
थोड़ी ही देर में वो बोल पड़ी- अब कुछ कर दो राज … मुझसे रुका नहीं जा रहा है। प्लीज कुछ करो … आह्ह … मुझे नीचे कुछ हो रहा है।

मैं भी समझ गया कि अब उसकी चूत में जो आग लगी है उसको लंड ही बुझा सकता है।

मैंने उसकी चूत पर लंड को रखा और उसको ऊपर नीचे करने लगा।
लंड को मैं उसकी चूत पर दबाव बनाकर रगड़ रहा था जिससे उसको लंड का पूरा अहसास अपनी चूत की फांकों पर मिल रहा था।

फिर मैंने उसकी चूत में एक झटका मारा। चूत गीली होने की वजह से लंड का टोपा उसकी चूत में एकदम से घुस गया और उसकी चीख निकल गई।

उसको बहुत तेज दर्द होने लगा और वो चिल्लाने लगी- आई … ऊईई … मर गई … आह्ह … निकालो … बाहर निकालो इसे अभी … प्लीज … निकालो।
मैंने उसके मुंह पर हाथ रखा और किसी तरह से उसको शांत करवाया।

चूंकि पास में ही डीजे चल रहा था तो आवाज किसी को नहीं सुनाई दे सकती थी।
थोड़ी सी शांत होने के बाद मैंने उसकी चूत में अपने लंड को धीरे से चलाना शुरू किया।

उसको अभी भी दर्द हो रहा था लेकिन अब वो थोड़ा सा दर्द बर्दाश्त करने की भी पूरी कोशिश कर रही थी।

मैं जानता था कि उसको भी लंड से चुदने का मजा लेना था।
बहुत दिनों से हम दोनों के जिस्म मिलन के लिए तड़प रहे थे इसलिए प्रतीक्षा भी मेरा साथ देने की कोशिश कर रही थी।

धीरे धीरे हल्के झटके देते हुए मैंने अपना पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया।
लंड पूरा जाने के बाद मैं रुक गया और उसको किस करने लगा।
मैं कभी उसकी गर्दन को चूम लेता तो कभी होंठों को चूसने लगता।

अब उसका दर्द लगभग खत्म हो गया था।
वो नीचे से अपनी चूत को हल्के से उठाने लगी थी।
उसे लंड लेने का मजा आने लगा था।

मैं उसका इशारा समझ गया और धीरे धीरे उसकी चूत में लंड को आगे पीछे करने लगा।
वो फिर से हल्के हल्के कराहने लगी लेकिन ये कराहटें जल्द ही उसकी मादक सिसकारियों बदल गईं।
अब वो मस्ती में सिसकारने लगी- आह्ह राज … आआह हह … अम्म … आई लव यू राज … आह्ह … आई लव यू … ओह्ह।

अब मैंने भी तेज तेज झटके लगाने शुरू कर दिए।
मुझे भी पूरा मजा आ रहा था।
उसकी चूत बहुत टाइट थी।

प्रतीक्षा अब आराम से मेरा पूरा लंड अपनी चूत में ले रही थी।
उसकी चूचियों के निप्पल अब तनकर पूरे सख्त हो गए थे।
नीचे डीजे की धम-धम हो रही थी और ऊपर हमारी चुदाई की थप-थप हो रही थी।

खुली छत पर हल्की हल्की ठंडी रात में उसकी चूत मारने में ऐसी गर्मी मिल रही थी कि बस मजा आ गया।

मैंने 15 मिनट तक उसको चोदा और फिर मेरा माल निकलने को हो गया।
प्रेग्नेंसी के डर से मैंने लंड को एकदम से बाहर खींच लिया और उसके पेट पर सारा माल झड़ गया।

फिर मैंने उसको कपड़े से साफ किया और हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर लेट गए।
लेटे हुए उसके कोमल नर्म जिस्म को मैं प्यार से सहला रहा था।
वो भी मेरे बालों को सहला रही थी।

मैंने उसकी चूत को सहलाना शुरू किया तो उसने मेरा हाथ हटा दिया और कहने लगी कि बहुत दर्द हो रहा है वहां पर!
मैंने उसकी चूत से हाथ हटा लिया और उसकी चूचियों को छेड़ने लगा।
उसकी चूचियां अभी भी काफी टाइट थीं।

पांच मिनट तक मैंने उसकी चूचियों के दबाया और बारी-बारी से उनको पीया भी।
वो भी मजे से अपनी चूचियां मुझे लेटे लेटे पिलाती रही।

हम दोनों को जैसे किसी का डर ही नहीं था।

फिर उसके घर से किसी का फोन आने लगा तो हमारा प्यार का नशा उड़ गया।
हम जल्दी से संभले और वहां से उठ गए।

उसके बाद जल्दी से अपने-अपने कपड़े पहन लिए।

उसको चलने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी लेकिन फिर भी उसने खुद को संभाल लिया।

उसके बाद हम दोनों भी उसी कार्यक्रम में शामिल हो गए।
इस तरह चुदाई हो गई और किसी को शक भी नहीं हुआ।

अगले दिन फिर मैंने उसको दर्द की दवाई लाकर दी।
उसने वो दवाई ली और उसके बाद वो ठीक हो गई।

उस दिन के बाद से प्रतीक्षा और मैं मौका पाकर चुदाई करने लगे।

मैंने बहुत बार अपनी गर्लफ्रेंड की चूत मारी और उसकी गांड भी मारी।
अभी भी हम दोनों का चक्कर चल रहा है। मैं उसकी चूत को बहुत चाटता हूं और अब वो भी मेरा लौड़ा चूसती है।

मुझे उसकी चूत का रस पीना बहुत पसंद है। वो भी मेरे लंड का माल पी जाती है।
उसकी चूत अब काफी खुल चुकी है क्योंकि मैं उसे बहुत बार चोद चुका हूं लेकिन उसकी चूत मारने में अब भी बहुत मजा आता है।

तो दोस्तो, ये थी मेरी गर्लफ्रेंड की पहली चुदाई की कहानी।

आप लोगों को ये देसी गर्लफ्रेंड सेक्सी कहानी पसंद आई होगी. अपना फीडबैक मुझे जरूर दें।
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