सड़क पर मिली कमसिन बुर को चोदा – Gandi Kahaniya

देसी जवानी की कहानी झुग्गी में अपनी अम्मी के साथ दूकान चलाने वाली एक अल्हड़ जवान लड़की की पहली चुदाई की है. वो मेरे हाथ कैसे लगी?

मैं 28 साल का हूँ. मेरा नाम रवि है.

यह देसी जवानी की कहानी अभी कुछ समय पहले की है. मैं ऑफिस जा रहा था. तभी मैंने रास्ते में देखा कि भीड़ का हुजूम लगा हुआ है.

मैंने पास जाकर देखा कि एक बाइक वाले ने एक बच्चे को टक्कर मार दी थी.
इसमें गलती छोटे लड़के की थी, वो अपनी मां का हाथ छोड़ कर रोड क्रॉस करने लगा था.

तभी बाइक वाले ने बचने और बचाने की काफी कोशिश की, फिर भी वो टकरा गया और दोनों को बहुत चोट लग गई थी.

मैं ये सब देख कर आगे बढ़ने की सोचने ही लगा था कि तभी भीड़ में मैंने एक लड़की को देखा, जो पास की झुग्गी में रहती थी.

वो बिना दुप्पटा के थी. वो लौंडिया ब्लू कलर के सूट में थी.

मैं उसके पास जाकर खड़ा हो गया और अपने हाथ की कोहनी उसके गोल गोल मम्मों में सटाने लगा.
क्या नर्म नर्म चूची थी … मजा आ गया.
मेरा लौड़ा खड़ा होने लगा.

उस लड़की ने पहले तो इस बात पर गौर नहीं किया, पर जब बाद में उसे मेरी कुहनी अपने दूध पर कुछ ज्यादा गड़ती सी महसूस हुई तो वो जरा छिटक कर दूर खड़ी हुई और मेरी तरफ देखने लगी.

मैंने उसकी आंखों को एक बार देखा और भीड़ की तरफ देखने का ड्रामा करने लगा.

वो कुछ समझ तो गई थी मगर उसने कुछ नहीं कहा.

एक दो मिनट बाद वो फिर से मेरे करीब हो गई.
मैंने फिर से कुहनी उसकी तरफ की तो इस बार उसने कुछ नहीं कहा बल्कि वो खुद अपनी चूची मेरी कुहनी से रगड़वाने लगी.
मैं समझ गया कि लौंडिया खुद मर मिटी है.

अब मैंने उसकी तरफ देखा और होंठ गोल करके चुम्बन करने जैसा इशारा किया.
वो मुस्कुरा दी.

अब लड़की हंसी तो फंसी.
मैंने उसका हाथ पकड़ा और बाहर ले जाने लगा.
उसने मुझसे अपना हाथ छुड़ाया और खुद ही मेरे पीछे पीछे आने लगी.

कुछ दूरी पर एक छोटी सी दुकान थी.
मैं वहां गया और एक सिगरेट लेने के लिए दुकानदार को खोजने लगा.
उस दुकान में कोई दुकानदार नहीं था.

तभी उसी भीड़ में से वो लड़की आई और पूछने लगी- हां क्या लोगे भाईजान?

मैंने दो उंगलियां अपने होंठों पर रखी और इशारा किया.
वो हंस दी और बोली- धत्त.

मैंने कहा- अबे यार मैं गोल्ड फ्लेक की सिगेरट मांग रहा हूँ.
वो बोली- अरे मैंने समझी कि तुम कुछ और मांग रहे हो?

ये कहते हुए उसने मुझे गोल्ड फ्लेक की डिब्बी में से एक सिगरेट निकाल कर दे दी.

मैंने सिगरेट होंठों में लगाई और उससे माचिस देने का इशारा किया.
उसने खुद ही लाइटर जला कर मेरी सिगरेट को सुलगा दिया.

कसम से दिल खुश हो गया था क्योंकि जब वो मेरी सिगरेट सुलगा रही थी तो उसके कुर्ते के गहरे गले से उसकी चूचियों की मादक घाटी मेरा लंड खड़ा करने लगी थी.

मैंने कश खींचा और धुंआ उसकी तरफ उड़ाते हुए कहा- बड़े ही खूबसूरत हैं.
वो मेरी तरफ देखने लगी और बोली- क्या खूबसूरत हैं?

मैंने आंखों के इशारे से उसके मम्मों को देखा, तो वो शर्मा गई और झट से अपने दुपट्टे से अपनी चूचियों को ढकने लगी.
मैं उसकी तरफ ही देखता रहा.

उसके गोल गोल मम्मे आगे से ऐसे नुकीले थे मानो किसी को चुभोने के लिए एकदम रेडी हों.

मैं उसको देखता रहा, वो भी मुझे देखती रही कि मैं उसके मम्मों को देख रहा हूँ.

कुछ पल बाद उसने पूछा- कुछ और चाहिए?
मैंने कहा- हां, दो तो बताऊं.

वो हंसती हुई अपनी दुकान का सामान ठीक करने लगी.
अब मैं उसे काम करते हुए देखने लगा और सिगरेट पीने लगा.

थोड़ी देर बाद वो अपनी दुकान के खोखे से बाहर आई और मेरी तरफ देखने लगी.
मैंने उसको देख कर फिर से एक स्माइल पास की.
वो भी थोड़ा मुस्कुराई.

अब उसकी मां भी आ गई थी.
मैंने पैसे दिए और एक और सिगरेट लेकर वहां से चला गया.

थोड़ी दूरी पर एक मोड़ था. उधर मेरी बाइक खड़ी थी.

मैं वहां से अपनी बाइक निकाल ही रहा था, तभी मैंने अपने पास से उसको रोड क्रॉस करते देखा.

अब मैंने उसे आवाज दी- क्या नाम है?
उसने अपना नाम बताया लेकिन ट्रैफिक होने के कारण सुनाई नहीं दिया, वो आगे बढ़ती जा रही थी.

मैंने 2-3 बार पूछा और वो भी अपना नाम बताती रही … लेकिन मेरी समझ में नहीं आया.
फिर वो हंसती हुई चली गई.

दूसरे दिन मैं अपनी कार से ऑफिस जा रहा.
उसी जगह से गुजरते हुए मुझे उसकी याद आ गई.

मैं कार स्लो करके उसको देखने लगा.
तभी मुझे वो देखाई दे गई.
आज वो कहीं जा रही थी.

मैं उसके पास कार लेकर आया और उसको सीटी मारी.
उसने मेरी तरफ देखा तो मैंने उसको कार में आने का इशारा कर दिया.
वो मना करने लगी लेकिन एक दो बार बोलने के बाद मान गई.

वो कार में मेरे बाजू में बैठ गई.
मैंने पूछा- कहां जाओगी?

तो वो बोली- आगे इसी रास्ते पर एक कॉलेज पड़ता है, उधर जा रही हूँ.
मैंने उससे फिर से उसका नाम पूछा, तो वो हंसने लगी.

वो बोली कि अभी ही तो बोला था.
मैंने कहा- शोर की वजह से सुनाई नहीं दिया था.

उसने अपना नाम अतूफ़ा बताया. वो इस ड्रेस में बड़ी मस्त लग रही थी. मैंने ध्यान से देखा कि उसके चूचे नीम्बू से थोड़े से बड़े थे.

देसी जवानी देख मेरे अन्दर उत्तेजना पैदा होने लगी थी.

मैंने उससे पूछा- कार का गियर बदलोगी?
वो बोली- मुझे नहीं आता, कैसे करते हैं?

मैंने कहा- मैं सब सिखा दूंगा कि कैसे करते हैं.
वो अचकचाई और बोली- मतलब?

मैंने कहा- मतलब बाद में समझ लेना. अभी हाथ इधर दो.
वो कुछ नहीं बोली और न ही उसने अपना हाथ आगे किया.

मैंने उसका हाथ पकड़ कर गियर पर रखा और गियर लगाना सिखाने लगा. उसका कोमल हाथ पकड़ने से मेरा लंड खड़ा होने लगा.

मैंने उससे बोला- आज मैं तुम्हें कार चलाना सिखा दूंगा, सीखोगी?
वो मान गई.

मेरी आंखों में खुशी झलक रही थी.
मैं अब कार को खाली और सुनसान जगह ले गया.
उधर उसको कार के पार्ट्स के बारे में बताने लगा.

फिर मैंने उसको ड्राइविंग सीट पर आकर बैठने को कहा और कार कैसे स्टार्ट होती है … वो बताया.

वो बोली- मुझे उस सीट पर आना है?
मैंने कहा- हां.

वो बोली- फिर तुम किधर बैठोगे?
अब मेरी बारी थी.

मैंने उससे कहा- मैं भी इसी सीट में बैठूँगा. तुम्हें मेरी गोद में बैठना होगा.
वो एक बार मुस्कुराई और तुरंत मान गई.

वो मेरे कड़क लंड पर बैठने को तैयार थी.
मैं पीछे को सरक कर बैठ गया और वो मेरे लौड़े पर बैठने ऐसे आ गई मानो आज उसका चुदाई का दिन था.

उसकी नर्म नर्म गांड मेरे कड़क लंड के ऊपर जम गई.

मुझे बेचैनी होने लगी और एक सिगरेट की तलब होने लगी.
मैं डेशबोर्ड पर रखी सिगरेट की डिब्बी उठाने लगा.

वो बोली- अब सिगरेट पियोगे कि मुझे चलाना सिखाओगे?
मैंने कुछ नहीं कहा बस उसकी नर्म गांड का अहसास करता रहा.

कार की खिड़की का शीशा नीचे करके मैंने सिगरेट सुलगाई और कश लेने लगा.
वो कुछ नहीं बोली और मेरे सीने से टिक गई.

थोड़ी देर बाद मैंने उसको पीठ पर चूमना चालू कर दिया. साइड से उसके मम्मों को छूना और दबाना शुरू कर दिया.
वो भी समझ रही थी.

उसने मुझसे कहा- लाओ सिगरेट मुझे दे दो और कार चलाना सिखाओ.
मैंने सिगरेट उसे पकड़ा दी और मुझे चौंकाते हुए उसने खुद सिगरेट पीना शुरू कर दिया.

मेरे दोनों हाथ खुले थे तो मैंने उसके दोनों मम्मों पर हाथ जमा दिए और सहलाने लगा.
वो आह आह करने लगी.

अब मैंने उसके गले और गाल को चूमना शुरू कर दिया.
वो भी खुश थी क्योंकि वो अपनी कामना पूरी कर रही थी.

मैंने उसकी टांगों के बीच में हाथ लगाया, तो उसकी चुत के पास गीला हो गया था.

मैंने चुत को रगड़ना चालू कर दिया.
वो समझ गई और कसमसा कर बोली- भाईजान ये क्या कर रहे हो?
मैंने बोला- कुछ नहीं … तुमको मजा दे रहा हूँ.

मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया था और उसकी गांड में चुभ रहा था.
वो भी गर्माने लगी थी और उसने अपनी गांड को एक दो बार मेरे लंड पर रगड़ कर मुझे हरी झंडी दे दी.

उसकी गांड के बीच में मेरा लंड अटक गया था.

अब मैंने गाड़ी स्टार्ट कर दी और उससे कहा कि तुम बाद स्टेयरिंग पर हाथ रख लो.

उसने हाथ में दबी सिगरेट बाहर फैंक दी और अपने हाथ स्टेयरिंग पर जमा दिए.

अब मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी सलवार के अन्दर डाला और उसकी पैंटी के ऊपर से चूत पर रख दिया, तो वो सीत्कार उठी.

अब गाड़ी आगे चलने लगी थी. मैं अपना हाथ उसकी चुत में और ज्यादा रगड़ने लगा.

मैंने अचानक से अपना हाथ उसकी पैंटी के अन्दर डाला और चूत को टच कर दिया.

ये महसूस करते ही उसने अचानक से पैर ब्रेक पर रख दिया और झटके में गाड़ी रुक गई.
उस झटके से हम दोनों आगे की ओर झुक गए.

मैंने गाड़ी बंद की और झट से उसे पकड़ लिया. अब मेरा एक हाथ उसके दाहिने दूध पर था और बांया हाथ उसकी चूत पर.

उसकी सांसें ऊपर नीचे होने लगीं.
वो चुप बैठी रही.
मैंने उसको पीछे से पकड़ कर उसकी पीठ और गर्दन पर गहरा चुम्मा लिया.

वो कुछ नहीं बोली, उसने सब कुछ होने दिया.

मैंने उसके कपड़े के अन्दर हाथ डालना शुरू किया तो वो मदहोश होने लगी.
एक तरह से उसने अपने आपको मेरे हवाले कर दिया था.

फिर वो मेरी तरफ मुड़ कर गले से लग गई.
मैंने भी उसे गले से लगाया और उसके होंठ चूसना शुरू कर दिए.
वो भी साथ दे रही थी.

मैंने हाथ से महसूस किया तो चूत एकदम से रसीली हो गई थी शायद उसने पानी छोड़ दिया था.
उसके नर्म नर्म दूध और गर्म गर्म चुत से मुझे मजा आ गया.

मैंने उसको पीछे वाली सीट पर बैठने को बोला और कार के सभी विंडो को अखबार से कवर कर दिया.

वो गाड़ी से उतर कर पीछे कि सीट पर चली गई. मैं भी पीछे चला गया.

वो सीट पर लेट गई थी और मैं उसके ऊपर चढ़ गया था. मैंने उसके पूरे जिस्म से एक एक करके सारे कपड़े हटा दिए और उसे बिल्कुल नंगी कर दिया.

उसकी चूत पर काले रेशमी बाल थे. मैंने चूत को सहलाया और उसको फिर से गर्म कर दिया.

वो आंह आह कर रही थी.

मैंने एक उंगली उसकी चूत में डाली, तो अतूफ़ा चिल्ला उठी.
मैं समझ गया कि लौंडिया सील पैक माल है.

मैंने उसकी चूत को चाटना और चूसना शुरू कर दिया.
वो एकदम से गर्म हो उठी और अपने दूध दबाने लगी.

मैं समझ गया कि अब उसे चोदने का सही समय आ गया है.
मैंने लंड निकाल कर उसके मुँह में दे दिया. वो थूक लगा कर लंड चूसने लगी.

मैं कभी उसका एक दूध चूसता, तो कभी दूसरा.
मेरा हाथ उसकी चूत को लगातार रगड़ रहा था.

थोड़ी देर बाद मैं लंड को चूत में रगड़ने लगा और धीरे से लंड को अन्दर पेल दिया.

वो चिल्लाई और उसने खुद ही अपने हाथों से अपना मुँह बंद कर लिया.

एक दो पल बाद उसकी बुर से खून आने लगा.
मैंने कार में रखे टिश्यू पेपर बॉक्स से टिश्यू पेपर निकाल कर उसकी चूत को साफ किया और फिर से चोदने लगा.

कुछ देर बाद वो भी साथ देने लगी और मस्त होने लगी- आंह और तेज … और तेज करो मजा आ रहा है भाईजान … और अन्दर डालिए.’

दस मिनट की धकापेल के बाद मेरा रस निकलने वाला था.
मैंने उससे पूछा- कहां निकालूं?

वो बोली- क्या निकालोगे?

मतलब वो समझ ही नहीं पाई थी कि मैं क्या पूछ रहा हूँ.

मैंने बिना कुछ बोले लंड चुत से बाहर खींचा और उसके पेट व चूत के ऊपर पानी छोड़ दिया.
मैं झड़ कर रिलैक्स हो गया और सीट पर बैठ गया.

मैंने टिश्यू पेपर से उसके पेट को साफ़ करते हुए पूछा- कैसा लगा?

वो हंसने लगी और उसने मेरे गाल पर एक किस दे दिया.
मैंने भी उसे गले से लगा लिया. मैं उसके छोटे छोटे से दूध चूसने लगा, उनके साथ खेलने और सहलाने लगा.

वो फिर से गर्म हो गई और बोली- एक बार फिर से करते हैं.

मैंने भी ऑफिस फोन किया और आज न आने का कहा.

अब मैंने उससे कहा कि चलो किसी ढंग कि जगह चलते हैं. तुम्हें जल्दी तो नहीं है?
वो बोली- चार बजे तक कोई टेंशन नहीं है.

मैंने उसे अपने फ्लैट में ले गया और उस देसी जवानी को नंगी करके पहले उसकी झांटें साफ़ की और साथ में नहाया.

फिर उसे बिस्तर पर लाकर जबरदस्त चूसा और रगड़ा.
उस दिन तीन बजे तक उसे मैंने चार बार रगड़ा और उसे दर्द की गोली खिला कर उसके घर के पास छोड़ आया.

आपको मेरी ये देसी जवानी की कहानी कैसी लगी … प्लीज़ मुझे मेल जरूर करें.

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